Invitation to May Day 2018 Celebrations

21 Apr

प्रिय साथी,

 1 मई, यानी मजदूर दिवस का दिन जन जागरण शक्ति संगठन के लिए एक ख़ास दिन है | इस दिन संगठन से जुड़े नए साथियों को संगठन का एक बड़ा स्वरुप देखने को मिलता है जिससे उनकी संगठन की समझ बढती है | नए-पुराने साथियों को अलग-अलग इलाके में चल रहे संघर्षों को जानने-बूझने का मौका भी मिलता है | साथ ही अलग अलग मुद्दों पर हमारी सामूहिक समझ बनती है | हमारी एकता और बंधुत्व और मजबूत होता है |

ज्ञात हो कि 1 मई दुनिया भर के मेहनतकशों के लिए एक ख़ास दिन है और “अन्तरराष्ट्रीय मजदूर दिवस” के रूप में मनाया जाता है| मई दिवस का इतिहास दुनिया भर के मेहनतकशों के लिए काम की अवधि से जुड़ा हुआ है | आज हम बड़े सहज रूप से मान लेते हैं कि हर दिन दफ्तर में या कारखाने में 8 से 9 घंटा ही काम करना पड़ता है पर उन्नीसवीं शताब्दी में मजदूरों को सूर्योदय से सूर्यास्त तक काम करना पड़ता था | उदहारण के लिए न्यू यॉर्क के पावरोटी उद्योग के मजदूरों को 18 घंटा काम करना पड़ता था | काम की अवधि निश्चित हो और 8 घंटा प्रतिदिन हो इसके लिए बड़ी लड़ाई लड़ी गयी | इसमें जीत भी हासिल हुई | मई दिवस इस जीत और मेहनतकशों के हक़ में हुए तमाम आन्दोलनों और संघर्षों का प्रतीक है | इन संघर्षों में कई साथी शहीद भी हुए हैं |  इसलिए 1 मई को दुनिया भर के मेहनतकश जश्न मनाते हैं और शहीद साथियों को याद करते हैं|

इस दिन हम आज के अपने संघर्षों पर नजर डालते हैं और आगे बढ़ने के लिए हौसला बुलंद भी करते हैं | मशीनीकरण और “ठेका” के दौर में ऐसे रोज़गार का भयानक आभाव है जिससे गरिमापूर्ण जीवन जिया जा सके | बुढ़ापे में इन श्रमिकों के लिए कोई सहारा नहीं है | पेंशन के नाम पर केंद्र सरकार 200 रु प्रतिमाह देती है | रोजगार गारंटी कानून में मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं देकर सरकार खुद ही लोगों से बेगार करवा रही है | जरुरत है कि हम अपने संघर्षों को तेज करें| न्याय की इस लड़ाई में हमें आपका साथ चाहिए |

“वे लोग जो महल बनाते हैं और झोंपडि़यों में रहते हैं, वे लोग जो सुन्दर-सुन्दर आरामदायक चीज़ें बनाते हैं, खुद पुरानी और गंदी चटाइयों पर सोते हैं। ऐसी स्थिति में क्‍या करना चाहिए? ऐसी स्थितियाँ यदि भूतकाल में रही हैं तो भविष्‍य में क्‍यों नहीं बदलाव आना चाहिए? अगर हम चाहते हैं कि देश की जनता की हालत आज से अच्‍छी हो, तो यह स्थितियाँ बदलनी होंगी। हमें परिवर्तनकारी होना होगा।” भगत सिंह के इस कथन से प्रेरणा लेकर आठ साल पहले, 1 मई , 2010 को अररिया के सुदूर ताराबाड़ी हाट पर हज़ारों मजदूर किसान और मेहनतकश लोगों ने अपने संगठन, जन जागरण शक्ति संगठन, की घोषणा की थी | तभी से हर साल हम मई दिवस के मौके पर साथ आते हैं और एक घुमंतू मजदूर मेले का आयोजन करते हैं | इस साल यह मेला मनसाही ब्लॉक, कटिहार के मैदान में मनाया जाएगा | आप तमाम लोगों से आग्रह है कि अगर संभव हो तो इस साल मजदूर दिवस अररिया, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा और वैशाली के मजदूर किसान साथियों के साथ मनाएं |

हम आपको आपके वार्षिक सहयोग के बारे में याद दिलाना चाहते हैं | हमें फंड कि जरुरत है | कृपया कर जन जागरण शक्ति संगठन को अपने काम को जारी रखने के लिए आर्थिक सहयोग करें | ईमेल से अपना संकल्प भेजें|

सधन्यवाद !

रणजीत पासवान , आशीष रंजन , शिवनारायण , जितेन , ब्रह्मानंद , अजय, फूल कुमारी, आशा  देवी, मो. अयूब, रीना  देवी, दीपनारायण (सिकटी) , दीपनारायण पासवान, कृष्ण कुमार  सिंह

जन जागरण शक्ति संगठन (ट्रेड यूनियन क़ानून के तहत पंजीकृ: प.सं. 4119/2011)

 

संपर्क : 9973363664 / 7319662732 email: janjagranbihar@gmail.com www.facebook.com/jjssbihar www.jjssbihar.wordpress.com

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जवाब दो, हिसाब दो!

29 Jan

27.01.18            प्रेस विज्ञप्ति                      

राज्य और केंद्र सरकार अररिया की कर रही उपेक्षा

केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अररिया जिला की उपेक्षा और चुनावी वादा को पूरा नहीं करने पर जन जागरण शक्ति संगठन और जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय और लोकधारा द्वारा चार दिवसिय अररिया यात्रा अररिया आर.एस से हुई शुरू

अररिया 27 जनवरी 2018 | अररिया उपचुनाव को मद्देनजर रखते हुए, केंद्र और राज्य सरकार की उपेक्षा और चुनाई वायदों को पूरा नहीं करने पर इन दोनों सरकार के खिलाफ आरोप गठित कर जनता की चार्जशीट बनायी गयी है | इस चार्जशीट को अररिया के लोगों के सामने रखने 27-30 जनवरी तक जन जागरण शक्ति संगठन लोकधारा, और जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, बिहार द्वारा यात्रा की शुरुआत अरिया आर.एस रेलवे स्टेशन से हुई |

चुनाव के पहले भाजपा द्वारा बहुत सारे वायदे किये गए थे | प्रतिवर्ष 1 करोड़ रोजगार सृजित होगा, काला धन वापिस आएगा और 15 लाख लोगों के खाता में आएगा प्रमुख रूप से उछाला गया था | अररिया जैसे पिछड़े जिलों का विकास कर विकसित जिलों के सामान लाया जायेगा | पर पिछले साल की बाढ़ से अररिया पांच साल और पीछे चला गया | बाढ़ राहत के नाम पर अररिया वासी को सिर्फ 6000 रु और फ़ूड पैकेट का राहत इस बात को साबित करता है कि केंद्र और राज्य सरकार हमारे इलाके के लिए सोच नहीं रही | उसी तरह नितीश सरकार ने सात निश्चय जिसमें घर घर नाली और पानी और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता का वादा किया गया था पर वह भी जमीन पर दिख नहीं रहा और सरकार की पूरी मशीनरी सिर्फ शराब बंदी और दहेज़ बंदी के प्रचार प्रसार में लगी है | लाखों बुजुर्ग, विकलांग और विधवाओं को दो साल से पेंशन नहीं मिला पर किसी को फ़िक्र ही नहीं, सब आराम से हो रहा है |

(यात्रा के कुछ क्षण, JJSS साथी सुमंत्रो द्वारा)

कुछ वर्ष पहले जब केंद्र में यू.पी.ए सरकार थी तो नितीश कुमार बिहार राज्य को विशेष दर्जा दिलाने का अभियान चला रहे थे, उसका क्या हुआ ? आज उनका गठबंधन राज्य और केंद्र दोनों पर राज कर रहा है लेकिन बिहार पूरी तरह उपेक्षित है और अधिकतर वायदे चुनावी जुमला ही साबित हो रहा है |

विकास कि बातों से ध्यान भटकने के लिए,  बोली-बानी, खान-पान-पहनावा, धर्म के नाम पर पूरे सीमांचल के लोगों में विष फैलाया जा रहा है | देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है | जो लोग लोगों को बाटने कि राजनेति का विरोध कर रहे हैं उन्हें चुप कराया जा रहा है | पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी जाती है और प्रधानमन्त्री चुप रहते हैं |

यात्रा में जुड़े वार्ड न० 6 के वार्ड पार्षद रणजीत पासवान ने कहा कि भाजपा ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में वायदा किया था कि 100 पिछड़े जिलों का विकास कर विकसित जिलों के सामान बनाया जाएगा लेकिन 2014 से अभी तक एक नई ट्रेन नहीं चला सकी सरकार | पिछले सरकार द्वारा चाई गयी सीमांचल का हाल तो किसी से छुपा नहीं है |

जन जागरण शक्ति संगठन की कामयानी स्वामी ने कहा कि गुजरात में विकास पागल हो गया है और हमारे यहाँ विकास खो गया है | अररिया में एक विश्विद्यालय नहीं है जहां हमारे नौजवान अपना भविष्य बना सके | जिला अस्पताल में डाक्टर कि कमी के कारन किसी भी गंभीर बिमारी का इलाज नहीं हो पाता और लोगों को पूर्णियां, सिलिगुरी और पटना के प्राइवेट अस्पतालों में मजबूरन जाना पड़ता है | यात्रा में आशीष रंजन, तन्मय, डोली, शिवनारायण, नीरज, क्रिश्चम, मिथुन पासवान, मांडवी देवी और कई अन्य साथी शामिल हुए |

यात्रा अररिया, कुर्साकाटा, सिकटी और रानीगंज प्रखंड के पंचायतों का दौरा करेगी और जनता के सामने जनता का चार्जशीट रखेगी |

शिवनारायण, रंजित पासवान,  कामायनी स्वामी,  आशीष रंजन,   तन्मय,  जीतेन्द्र,  मांडवी,  मिथुन, क्रिस्चम, डोली, दिनेश मुखिया, नीरज, सुमन्त्रो एवं अन्य साथी

संपर्क : 9971950248/9973363664

Digital India Denies 10 lakh Pensioners

19 Dec

Digital India Denies 10 lakh Pensioners in Bihar

 15th December 2017

As per government’s own data, ten lakh pensioners are currently being denied their entitlement to social security. While the government has listed 63 lakh social security pensioners, only 53 lakh persons are actually getting this. The difference of approximately 10 lakhs is due to purely administrative lapses, such as wrong details entered in the database either on bank account numbers or names. No official is held liable for this cruel and inhumane denial of people’s entitlements.

This came to light during recently concluded camps  to spread awareness and use of the Bihar Lok Shikayat Nivaran Guarantee Act, 2015, which were held in Katihar and Araria from 27th November to 12th December.

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Through this exercise, the most severe grievances that emerged related to pensions.

S. No. Issue Total  % grievances
1 Pension 260 48
2 Flood Relief 146 27
3 Land 51 9
4 Other 80 15
    537

On further investigation in the website of the Department of Social Welfare www.elabharthi.nic.in it is clear that almost 10 lakh pensioners in the state are being denied their pensions.

Head

Numbers

Total Beneficiary

6302362

Total Beneficiary Paid

5389037

Not Being Paid

913325

Figures from: www.elabarthi.nic.in as of 13th December 2017

This could be for a variety of reasons, including; rejected by the Public Fund Management System (of Ministry of Finance), no Bank Account of IFSC Code, no Aadhaar with Bank Account, no Aadhaar and Bank Account not seeded. The worst affected districts are Madhubani, Saran, Bhagalpur and Darbhanga where over sixty thousand pensioners each are being denied their entitlement.

This does not even reflect the cases where person’s pensions have been sanctioned but not entered into the database. It also doesn’t reflect the countless number of persons who are eligible but who are not getting a pension. This only reflects the limited universe to which the government provides a social security pension.

Furthermore, the Government of Bihar is considering making payments through the Aadhaar Enabled Payment System from 1st April 2018. The move from cash to bank payments two years ago, has already excluded several lakhs of pensioners. This potential move to mandatory aadhaar will be disastrous, leading to situations like pensioner deaths in Rajasthan and hunger deaths in Jharkhand. At present, only 20% of the pensioners on the system have aadhaar seeded bank accounts.

We met Saryu Musahar in Bagulaha Panchayat of Raniganj in Araria District. Saryu Ji had not received his meager Pension amount of Rs 400/months for more than 1.5 years. He even showed us his Pan Card which he was forced to get to keep his account Operative by his local bank where he gets the Pension money.

This reflects the callousness and unpreparedness of the administration in bringing new policy measures, which affect the weakest and most vulnerable citizens in our society.

Jan Jagran Shakti Sangathan demands:

1.      An immediate review of the list of pensioners not receiving pension as per government data.

2.      Action taken on administrative officials for not reviewing and redressing these issues in a time bound manner.

3.      Immediately pay pensions, and the entire backlog for all pensioners on the system.

4.      It is clear that this figure of 63 lakh is an under representation of the true extent of eligible pensioners. Eligible persons may be enrolled on a camp basis.

5.      Under no circumstances should Aadhaar Enabled Payment System and biometric authentication be introduced into social security pensions.

 Ashish Ranjan Kamayani Swami Ranjit Paswan for the JJSS

 ph:+91 9973363664

A-5 Sidharth Apartment, Jagdeo Path, Patna-800014

www.jjabihar.org

 

28 Feb, 2017: Massive Protest Against Killings in Rahariya and Public hearing on Police accountability

22 Feb

Raharia

On First January, 2017, as the world rejoiced at the coming of the new year, two social-political activists in Araria district (Bihar) were killed by local landlords and their paid mercenaries as they were mobilising Dalits for their land rights. The two activists Kamleshwari Rishidev and Satnarayan Yadav, were affiliated to the CPI(ML). Houses of dalits were looted and the women were beaten and sexually assaulted. A three member fact finding team of the Jan Jagaran Shakti Sangathan (JJSS*) visited Rahariya, the village where the killings took place. The reports of the fact finding can be seen at twocircles.netsabrangindia and youth ki awaaz.

 

It was shocking to hear that not only could the local police not prevent the murder of the two activists, they were also silent witnesses to four Dalits being tied to a pole and mercilessly beaten at the “bathan” (farm house) of the landlord in full public view. Dalits who were assaulted told the fact team team that the landlords stopped the police from acting by openly reminding them of the bribes they had been paid for their inaction. It was only later when Police from the adjoining police station came that they rescued those tied to the pole, or else the death toll could have been higher on that fateful day.

 

Other than this, the JJSS members and ordinary people of Araria district face constant harassment by the Police, who hardly have any accountability towards the public. There are many cases of bribes being openly demanded to register cases, false cases are being registered against activists as deterrents to their work, no receipts are being given for applications filed at the police station, indecent behavior towards the complainant is rampant and so on. The range of treatment ordinarily expected by people from the police here is anything ranging from indifference to intimidation, a reason why people would rather resort to local panchayats than approach a system set up by the State specifically for ensuring public safety, security and peace. There are countless cases of women survivors, complainants and accused at police stations, having to deal with sexist stereotyping, character assassination, victim blaming – all amounting to sexual harrassment, stigma and added trauma for those already suffering. Other marginalised communities also continue living in inhibition and fear of the force. In the process, the one or two honest sincere, responsive members within the police also get their reputation maligned. All across the country just now, people are protesting draconian laws – whether it be AFSPA in Kashmir and parts of the North East or the Special Public Security Acts of Chattisgarh or Maharashtra because they all give State institutions like the police and army unchecked powers over the lives of ordinary citizens – powers that they are increasingly bent on abusing. Given this grim situation we have decided it is high time we responded to this slacking attitude of the police machinery and held them accountable to their duties and responsibilities. To this end we look forward to organizing a public hearing, along with the National Alliance of People’s Movements (NAPM) in Araria, Bihar on 28thFebruary, 2017 (Tuesday).

 

Public Hearing on Police Accountability and Police reforms

Date and Time : 28th February 2017 (11 am)

Venue : Town Hall, Araria, Bihar

 

Given your active interest in the field of social change, and focus on transparency and accountability in governance, we would like to invite you for this programme. We hope to start at 11 am and spend two to three hours on the public hearing, hearing those who have faced corruption and lack of accountability in the Police administration and also the opinion of the expert panelists. We would be inviting the police and civil administration, for this hearing. This public hearing would be followed by a massive rally in the town, to protest the Rahariya killings and establish the need for the Police Administration to be more accountable to ordinary citizens.

 

We sincerely hope you will be able to join us on the 28th of February, 2017 in this programme. We eagerly await your confirmation.

 

Thank you

 

Regards

Ranjit Paswan, Deepnarayan Paswan, Krishna Kumar Singh, Arun Yadav, Shivnarayan, Ashish Ranjan, Phool Kumari, Brahmanand Rishidev, Shivni Devi, Deepnarayan (Sikti), Asha Devi, Jitendra Paswan, Tanveer Alam, Sohini, Tanmay, Vijay, kamayani swami and all saathis at the JJSS

नजीर बना बिहार केंद्र भी पहल करे

4 Jul

कामायनी स्वामी और आशीष रंजन

यह लेख ३ जुलाई, २०१६ को राष्ट्रीय सहारा (हस्तक्षेप) में प्रकाशित हुआ |

ग्रामीण बिहार में अफसर को हुजूर कहकर संबोधित करना आम बात है | एक साधारण ग्रामीण मजदूर अपनी चप्पल उतारकर अभी भी जिला पदाधिकारी के कमरे में जाता है | सरकार को हम “माई बाप” मानते हैं | यह अंग्रेजों की गुलामी की विरासत है | इस “माई-बाप” वाली सरकार को हमारी सरकार में कैसे बदला  जाए एक गंभीर और चुनौतीपूर्ण विषय है  | सूचना का अधिकार आन्दोलन और उसके नतीजतन २००५ में बना सूचना का अधिकार कानून ने इस दिशा में कई दरवाजे खोले | पहली बार एक आम नागरिक  के पास ऐसा औजार आया जिससे वह “फाइलों” में दबी रहस्यों को साफ़ तौर पर जान सकें और सरकार से पूछताछ कर सके | अफसरशाही, भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता से आहत सरकारें भी थीं और इसलिए उन्हें भी यह कानून काम का लगा | हालांकि वह आशंकित भी थे | कैसे सरकारी सेवा बिना दफ्तर के चक्कर लगाए और बिना घूस दिए लोगों लोगों को मिले एक अहम् चिंता का विषय और एक बड़ा राजनैतिक मुद्दा बना |  इस माहौल में बिहार सरकार ने एक कदम आगे रखते हुए अगस्त २०११ में बिहार लोक सेवायों का अधिकार अधिनियम, 2011 (RTPS) पारित किया |

RTPS

इस कानून के तहत लोगों को समय सीमा के भीतर सरकारी सेवा पाने का अधिकार दिया गया  | सेवा पाने के लिए प्रखंड  स्थित RTPS काउंटर पर समुचित दस्तावेज के साथ आवेदन जमा करना होता है जिसकी रसीद मिलती है | समय सीमा के भीतर काम नहीं होने पर आवेदक ३० दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकार के पास अपील कर सकता/सकती है | अगर प्रथम अपील से संतुष्ट नहीं तो आवेदक ६० दिनों के अन्दर दूसरी अपील में जा सकता है | अपीलीय प्राधिकारों को वित्तीय दंड और विभागीय कारवाई करने की अनुशंसा करने की शक्ति प्रदान की गयी | कानून में 250 रु प्रति दिन के हिसाब से अधिकतम 5000 रु तक के दंड का प्रावधान है | द्वितीय अपील प्राधिकारी को अपीलीय प्राधिकारी को भी दण्डित करने की शक्ति दी गयी जो सूचना का अधिकार कानून से आगे का कदम है | लेकिन इस कानून में कई कमियाँ भी हैं | कोई स्वतंत्र अपीलीय प्राधिकार नहीं रखा गया | उसी विभाग के अधिकारी को अपीलीय प्राधिकार और द्वितीय अपीलीय प्राधिकार बनाने से अपील की व्यवस्था बेहद कमजोर कर दी गयी | इसके अतिरिक्त RTPS सभी सेवाओं पर लागू नहीं किया गया बल्कि जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और परिवहन विभाग से सम्बंधित कई काम, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दाखिल खारिज, जैसे कुछ चुनिन्दा सेवाओं को ही RTPS के दायरे में रखा गया |

जमीनी हकीकत :

पहले जहां आवेदन की रसीद पाना भी एक कठिन काम था, RTPS का आना एक बड़ी बात थी | हाथ में रसीद होना आगे जाने का रास्ता खोलता है और “सिंगल विंडो” काउंटर होने के कारण लोगों को अफसरों/कर्मचारियों के पीछे भागने से राहत मिली | इस पूरे प्रक्रिया का कम्प्यूटरीकृत होने से काम पहले की अपेक्ष सरल और तेजी से होने लगा | लाइसेंस, आवासीय और जाति प्रमाण पत्र निर्गत पाना पहले की अपेक्षा आसान हुआ और भ्रष्टाचार कम हुआ लेकिन अन्य सुविधाओं के बारे में वही नहीं कहा जा सकता | अगर जल्दी में कोई भी प्रमाण पत्र चाहिए तो पहले की तरह ही कर्मचारी को घूस देनी पड़ती है | अभी भी निश्चित समय में सेवा प्रदान नहीं की जाती और अगर घूस के बिना चक्कर लगाना पड़ता है | सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने की राह और भी कठिन है | बिचौलियों और पंचायत प्रतिनिधि को बिना घूस दिए काम नहीं होता | अपीलीय व्यवस्था काम नहीं कर रही और कर्मचारियों को दण्डित ना के बराबर किया जा रहा है |

कई राज्यों में RTPS की तरह का कानून बना है | इस दौरान भ्रष्टाचार ओर “गवर्नेंस” को लेकर देश में जन उभार हुआ | सूचना के जन अधिकार का राष्ट्रीय अभियान (NCPRI) ने इसको लेकर कुछ कानून प्रस्तावित किये जिसमे शिकायत निवारण कानून प्रमुख था हालांकि पूरी कोशिशों के बावजूद यह कानून संसद में पारित नहीं हो पाया | 2015 में बिहार सरकार ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून पारित किया | बिहार ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य बना |

बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015

इस कानून के तहत व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष किसी सरकारी योजना, कार्यक्रम या सेवा के तहत फायेदा लेने के लिए अथवा फायेदा नहीं मिलने पर परिवाद दायर कर सकेंगे | शिकायत दायर करने के लिए सरकार “सूचना और सुकरण” केंद्र की स्थापना करेगी | लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी समय सीमा के अन्दर परिवाद दायर करने वाले को सुनवाई का अवसर देंगे और फिर उसपर निर्णय लेंगे | प्रत्येक लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सप्ताह में कम से कम एक एक दिन परिवाद सुनने का दिन निश्चित करेगा | परिवादी अगर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट होता है या उसकी शिकायत दूर नहीं होती तो वह अपील कर सकेगा | अपील के दो स्तर हैं | कानून में दंड का भी प्रावधान है जो ५०० रु से लेकर अधिकतम ५००० रु तक है |


जमीनी हकीकत :
सरकार ने इस कानून के तहत नियमावली घोषित कर दी है | अब देखना है कि इसका कार्यान्वयन किस प्रकार से होता है |

बिहार की शिकायत निवारण कानून की एक बड़ी कमजोरी है कि वह शिकायत को सेवा/कार्यक्रम/योजना के ही दायर में देखता है जबकि शिकायत का स्वरुप कहीं अधिक वृहद् हो सकता है जैसा कि झालो देवी, ग्राम आमगाछी, प्रखंड सिकटी, अररिया के मामले में हुआ | उनका पेंशन पारित है लेकिन बैंक अकाउंट गलत होने के कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल पा रहा, उपर्युक्त दोनों कानून में इस शिकायत के लिए जगह नहीं है | कई बार एक शिकायत कई विभागों को एक साथ छूती है | ऐसे मामलों में लोगों के शिकायत का निपटारा कैसे होगा यह देखना पडेगा | अपील के लिए कोई स्वतंत्र प्राधिकार नहीं बनाया गया | दंड का जो प्रावधान है वह काफी कमजोर है | पंचायत/प्रखंड स्तर पर ही सुनवाई और निपटारा होने से लोगों को सुविधा होती | कानून बनाने की पूरी प्रक्रिया में सरकार ने कोई व्यापक चर्चा नहीं की जिसके कारण कई जन पक्षिय प्रावधान कानून में शामिल नहीं हो सके | पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर ठीक से अमल करने की हिम्मत अभी भी सरकार ने नहीं दिखाई है लेकिन एक कदम आगे बढ़ने का श्रेय इन दोनों कानून के लिए बिहार सरकार को देना पड़ेगा |

हम कैसा देश बनाना चाहते हैं और किसके लिए देश बनाना चाहते हैं

6 May

हम कैसा देश बनाना चाहते हैं

और किसके लिए देश बनाना चाहते हैं

नासिरूद्दीन 

(बेगुसराय में वामपंथी नेता चंद्रशेखर की जन्मशती समारोह के मौके पर आयोजित विचार विमर्श में प्रस्तुति)

एक

हमें कॉमरेड चंद्रशेखर को देखने का मौका नहीं मिला। हालाँकि हम जब कॉलेज में पहुँचे तो कॉमरेड चंद्रशेखर और उन जैसे लोगों की जिंदगी की कहानियाँ हमारे काम के लिए प्रेरणा बनीं। इसलिए कॉमरेड चंद्रशेखर की जन्‍मशति पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर मैं खुद को सम्‍मानित महसूस कर रहा हूं। मैं इसलिए भी सम्‍मानित महसूस कर रहा हूं कि इस मिट्टी से मेरा खास लगाव है। कन्‍हैया की ही तरह मेरी भी यहीं की मिट्टी में कहीं नाड़ गड़ी है। होशमंद जिंदगी में शायद दो या तीन बार ही बेगूसराय या बरौनी आने का मौका मिला है लेकिन बरौनी का नाम मेरी जिंदगी के हर दस्‍तावेज के साथ चस्‍पा है और ताउम्र रहेगा।

मुझे नहीं मालूम कि आयोजन समिति ने मुझमें ऐसा क्‍या पाया और मुझे आज के कार्यक्रम में आपके सामने खड़ा कर दिया। मैं कोशिश करूंगा कि अपनी पैदाइशी जमीन पर आप सब बड़े जनों के सामने मेरी जबान और पैर लड़खड़ाएँ नहीं।

दो

आज की बातचीत का विषय है, हम कैसा देश बनाना चाहते हैं। मैं इसमें एक और लाइन जोड़ रहा हूँ, किसके लिए हम कैसा देश बनाना चाहते हैं। मेरी समझ में इसके साथ दो चीजें जुड़ी हैं। एक, यह देश की मौजूदा हालात की बात करता है और दूसरा, भविष्‍य में हम देश को कैसा देखना चाहते हैं, इसके भी संकेत देता है? यह विषय उतना ही बड़ा है जितनी बड़ी इस मुल्‍क की चौहद्दी। एक सिरा पकड़ेंगे तो चंद कदम ही चल पाएंगे। मैं भी आपके साथ चंद कदम चलते हुए कुछ संवाद करने की कोशिश करूँगा।

तीन

इस मुल्‍क में पिछले कुछ दिनों से नारों के जरिए ही संवाद हो रहा है। कुछ नारों के जरिए हमारी भारतीयता, देशभक्ति, राष्‍ट्रभक्ति तय की जा रही है। तो कुछ नारे इस मुल्‍क में कुछ नया गढ़ने की बात कर रहे हैं। नारों के जरिए कैसा देश बनाने की कोशिश हो रही है, यह समझने के लिए मैं आपके साथ कुछ चीजें साझा करूंगा। मैं टुकड़ों-टुकड़ों में कई बात कहने की कोशिश करूँगा। ऐसी उम्‍मीद है कि बाद में आप सवाल जरूर करेंगे ताकि कुछ बातें अगर साफ न हो पाई हों तो वे साफ हों। वैसे, मेरे पास भी सवाल ही ज्‍यादा हैं।

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Panchayat Election Ghoshna Patra

17 Apr

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Apeal (Shah Matin) ward member