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Digital India Denies 10 lakh Pensioners

19 Dec

Digital India Denies 10 lakh Pensioners in Bihar

 15th December 2017

As per government’s own data, ten lakh pensioners are currently being denied their entitlement to social security. While the government has listed 63 lakh social security pensioners, only 53 lakh persons are actually getting this. The difference of approximately 10 lakhs is due to purely administrative lapses, such as wrong details entered in the database either on bank account numbers or names. No official is held liable for this cruel and inhumane denial of people’s entitlements.

This came to light during recently concluded camps  to spread awareness and use of the Bihar Lok Shikayat Nivaran Guarantee Act, 2015, which were held in Katihar and Araria from 27th November to 12th December.

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Through this exercise, the most severe grievances that emerged related to pensions.

S. No. Issue Total  % grievances
1 Pension 260 48
2 Flood Relief 146 27
3 Land 51 9
4 Other 80 15
    537

On further investigation in the website of the Department of Social Welfare www.elabharthi.nic.in it is clear that almost 10 lakh pensioners in the state are being denied their pensions.

Head

Numbers

Total Beneficiary

6302362

Total Beneficiary Paid

5389037

Not Being Paid

913325

Figures from: www.elabarthi.nic.in as of 13th December 2017

This could be for a variety of reasons, including; rejected by the Public Fund Management System (of Ministry of Finance), no Bank Account of IFSC Code, no Aadhaar with Bank Account, no Aadhaar and Bank Account not seeded. The worst affected districts are Madhubani, Saran, Bhagalpur and Darbhanga where over sixty thousand pensioners each are being denied their entitlement.

This does not even reflect the cases where person’s pensions have been sanctioned but not entered into the database. It also doesn’t reflect the countless number of persons who are eligible but who are not getting a pension. This only reflects the limited universe to which the government provides a social security pension.

Furthermore, the Government of Bihar is considering making payments through the Aadhaar Enabled Payment System from 1st April 2018. The move from cash to bank payments two years ago, has already excluded several lakhs of pensioners. This potential move to mandatory aadhaar will be disastrous, leading to situations like pensioner deaths in Rajasthan and hunger deaths in Jharkhand. At present, only 20% of the pensioners on the system have aadhaar seeded bank accounts.

We met Saryu Musahar in Bagulaha Panchayat of Raniganj in Araria District. Saryu Ji had not received his meager Pension amount of Rs 400/months for more than 1.5 years. He even showed us his Pan Card which he was forced to get to keep his account Operative by his local bank where he gets the Pension money.

This reflects the callousness and unpreparedness of the administration in bringing new policy measures, which affect the weakest and most vulnerable citizens in our society.

Jan Jagran Shakti Sangathan demands:

1.      An immediate review of the list of pensioners not receiving pension as per government data.

2.      Action taken on administrative officials for not reviewing and redressing these issues in a time bound manner.

3.      Immediately pay pensions, and the entire backlog for all pensioners on the system.

4.      It is clear that this figure of 63 lakh is an under representation of the true extent of eligible pensioners. Eligible persons may be enrolled on a camp basis.

5.      Under no circumstances should Aadhaar Enabled Payment System and biometric authentication be introduced into social security pensions.

 Ashish Ranjan Kamayani Swami Ranjit Paswan for the JJSS

 ph:+91 9973363664

A-5 Sidharth Apartment, Jagdeo Path, Patna-800014

www.jjabihar.org

 

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Panchayat Election Ghoshna Patra

17 Apr

Apeal (Deepa Devi)-sarpanchApeal (Deepa Devi)-sarpanch

Apeal (Shah Matin) ward member

Press Conference on Status of MNREGA

1 Dec

प्रेस विज्ञप्ति

1 दिसंबर, 2012

सरकार बिहार में मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार को स्वीकार करे

और

तत्काल भ्रष्टाचार से लड़ने और मनरेगा के बेहतर क्रियान्वयन के लिए ठोस कदम उठाये!

 

(I)                 संदर्भ – मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार एक हकीकत है!

गरीबों के लिए काम का हक एक कठिन संघर्ष के बाद मनरेगा के रूप में आया. बिहार जहाँ इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है वहाँ मनरेगा राजनितिक इच्छाशक्ती के अभाव में लाखों मजदूरों के आशाओं पर पानी फेर रहा है. हाल में ही जारी कि गयी सेंटर फॉर फ़ूड एंड एनवायरमेंट सिक्यूरिटी, दिल्ली  की रिपोर्ट एक बार फिर साबित करता है की बिहार के सबसे गरीब तबकों को काम नहीं दिया जा रहा है और भ्रष्टाचार व्याप्त है. पूर्व में भी भ्रष्टाचार की बात उठती रही है देखें handout 3 &4.

(II)               सरकार की प्रतिक्रया

मुख्यामंत्री ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए पहले तो भ्रष्टाचार को नकारा (प्रभात खबर, 30.11.12) और फिर हमें बताया की सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए राज्य व्यापी जांच कराई थीं जिनके बाद कई मनरेगा कर्मियों पर कार्यवाई की गयी है (हिन्दुस्तान, 1.12.12) हमारा मानना है की यह प्रतिक्रया नाकाफी है क्यूंकि:

  • अधिकतर कार्यवाई मनरेगा के अनियमित कर्मी पर की गयी और वरीय पदाधिकारियों को सुरक्षित रखा गया
  • सरकारी जांच जिनकी मुख्य मंत्री बात कर रहे हैं, वह उन ही मनरेगा कर्मियों द्वारा की गयी हैं जिन्हें यह योजना लागू करने की जिम्मेदारी है.

यह जांच और इन पर कार्यवाई की रिपोर्ट अभी तक जनता के सामने नहीं रखी गयी हैं.

इस रिपोर्ट के मीडिया में आने के बाद सरकार ने आनन् फानन में यह निर्णय ले लिया है कि मनरेगा की मजदूरी बैंक खातों में अनिवार्यत: दी जायेगी (फरवरी २०१३ तक लागू होगा) और जिन्होंने काम नहीं माँगा है अभी तक उनका खाता नहीं खोला जाएगा. बिना चर्चा किये हड़बड़ी में लिया गया यह कदम मनरेगा के मजदूरों की परेशानी सुलझाने के बजाए बढ़ा सकता है. जहाँ बैंक का आधारभूत ढांचा कमजोर है वहाँ यह मनरेगा के क्रियान्वयन में यह बाधा बनेगा और लोगों को मनरेगा के तहत मिले हक की हकमारी होगी. बैंक खाता खोलने को सरकार प्राथमिकता दे सकती है पर इसे अनिवार्य कतई नहीं करना चाहिए.

(III)             मनरेगा क्रियान्वयन की ज़मीनी हकीकत:

बिहार के विभिन्न जन संगठनों द्वारा बिहार सरकार को बार-बार कहा जा रहा है कि गरीबों के लिए  बने महत्वपूर्ण और बड़ी योजनाये खस्ता हालत में है और भ्रष्टाचार व्याप्त है. मसलन 2010 में अररिया जिले में जिला प्रशासन के साथ मिलकर मनरेगा का सामाजिक अंकेक्षण किया गया और पाया गया कि मजदूरी में 79 % की गडबडी है. यह भी बताया गया था कि पारदर्शिता के प्रावधानों का खुलेआम उन्लन्घन  किया जा रहा है . अंकेक्षण किये गए 74 कामों में से सिर्फ 20 कामों पर सूचना बोर्ड लगे हुए थे और 70 कामों के मस्टर रोल फर्जी थे. हमने मुजफ्फरपुर जिले के रत्नौली पंचायत में हुए घोटाले के बारे में भी सरकार को अवगत कराया था. हमने प्रसिद्द अर्थशास्त्री जां द्रेज के साथ 2010 में मुख्यमंत्री से मिलकर इस बात पर जोर दिया था कि मनरेगा में बिहार पिछड़ रहा है जबकी संभावनाएं बहुत हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि बड़े स्तर पर काम खोले जाएँ और सिचाई और बाढ़ नियंत्रण विभागों के साथ मिलकर बड़े काम लिए जाएँ. (देखें HANDOUT -1)

निश्चित ही राज्य सरकार मनरेगा में भ्रष्टाचार और अन्य परेशानियों से अवगत थी लेकिन राजनितिक इच्छाशक्ति न होने के वजह से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया.

सेवा यात्रा के दौरान लोगों के शिकायत पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूर्व के प्रधान सचिव ने राज्य भर में जांच के आदेश दिए थे पर कोई जांच रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं किया गया. उस जांच का क्या हुआ ? सरकार जांच रिपोर्ट और उसपर किये गए कार्यवाई को सार्वजानिक करे. सरकार इस बात का भी पूरा ध्यान रखे कि जांच के चलते काम को न रोका जाए.

नहीं मिल रहा है काम : काम नहीं तो भत्ता दो ! 

जैसा कि CEFS की रिपोर्ट में आया है हमारा भी यही अनुभव है कि लोगों को काम नहीं दिया जा रहा है. विश्व बैंक की 2012 एक रिपोर्ट * के अनुसार मनरेगा में काम चाह रहे 100 में से मात्र 21 लोगों को ही, बिहार में, काम दिया गया. उदाहरण के लिए चित्तोरिया और मोहनपुर पंचायत (कटिहार ) और रत्नौली पंचायत (मुजफ्फरपुर) को ही लीजिए, वहाँ लोगों ने लिखित काम माँगा है पर काम नहीं दिए जाने पर वह पलायन को मजबूर हो रहे हैं. प्रशासन से बार बार कहने के बावजूद हालत वही है – काम नहीं मिला और न ही बेरोजगारी भत्ता.  कटिहार और अररिया जिले में हमारे साथियों ने बेरोजगारी भत्ते का लिखित आवेदन भी दिया है पर कार्यवाई अभी तक नहीं हुई है. देखें Handout -2.

चिंताजनक यह भी है कि मनरेगा पर खर्चा पिछले सालों से बढ़ने के बजाए घट रहा है. 2010-2011 में जहाँ खर्च 2632 करोड़ था वहीं 2011-2012 में घट कर करीब 1660 करोड़ और इस साल (2012-2013) अभी तक का खर्च करीब 1208 करोड़ है. यह साफ़ दर्शाता है कि काम की कमी है.

जरुरत है कि नरेगा अधिनियम के मूल प्रावधानों जैसे बेरोजगारी भत्ता/विलम्ब से भुगतान से सम्बंधित सरकार नियम बनाये और “नोटीफाई” करे ताकी लोगों को उनका हक मिल सके.

(IV)          समाधान क्या है ?

जब हम समाधान कि बात करते हैं तो सबसे पहले जरुरत राजनीतिक इच्छाशक्ति की है. इसके बाद सबसे अहम है प्रशासन को पारदर्श और जबाबदेह बनाना. इसका पूरा ख्याल रखना होगा की काम न होने पर अफसर को जबाबदेह  ठहराया जाये और भ्रष्टाचार उजागर होने पर सख्त करवाई की जाये. भ्रष्टाचार रोकने के लिए सरकार ने कुछ साहसी कदम जरूर उठाये हैं – कुछ अफसरों के घरों को जरूर जब्त किया है पर यह नाकाफी और प्रतीकात्मक ही साबित हो रहा है.

दुखद है कि बिहार सरकार ने स्थापित रणनीतियों को भी नहीं अपनाया है. मसलन मनरेगा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए सामाजिक अंकेक्षण एक कारगार हथियार है पर अभी तक सरकार ने अंकेक्षण करने वाली जरूरी संस्था “social audit directorate” को अमली जामा नहीं पहनाया है. जबकी अररिया में 2 साल तक लगातार हुए सामाजिक अंकेक्षण के अनुभव से यह पाया गया है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है. 2010 के बाद 2011 में जब अंकेक्षण हुआ तो पाया गया कि भ्रष्टाचार में कमी आई और पारदर्शिता के प्रावधान के पालन में भी सुधार हुआ. ज्ञात हो कि नरेगा के अंकेक्षण नियम (मनरेगा स्कीमों की लेखा परीक्षा नियम, 2011) CAG  द्वारा अनुमोदित है

हमें बार बार यह लग रहा है कि सरकार मनरेगा के प्रति उदासीन है. 2010 तक तो मनरेगा में 50% पोस्ट खाली थे. आज भी भारी संख्या में रोज़गार सेवक और कनिय अभियंता की कमी है. पंचायत रोज़गार सेवकों को नियमित तनख्वाह नहीं दिया गया. क्या अपेक्षा यह थी कि वह भ्रष्टाचार कर अपना काम चलायें ?

अगर मंशा हो तो मनरेगा और अन्य योजनायों की भारी कमियों को दूर किया जा सकता है. जरुरत है कि मुख्यमंत्री महोदय गरीबों के इस सबसे बड़े और महत्वपूर्ण योजना के लिए प्रतिबद्ध हों.

(V)              हमारी मांगे:

  • आनन् फानन में बिना चर्चा किये मनरेगा में सिर्फ बैंक के माध्यम से भुगतान के निर्णय को वापस लिया जाये
  • सामाजिक अंकेक्षण के लिए एक स्वतंत्र निदेशालय का गठन किया जाये
  • पूर्व में किये गए राज्यव्यापी जांच की रिपोर्ट और उस पर हुई कार्यवाई को सार्वजानिक किया जाये
  • बेरोज़गारी भाता, देरी से भुगतान और धारा २५  जिसके तहत अधिकारियों को पर हर्जाना लगाया जा सकता है, के नियम के नियम जारी किया जाये .
  • PMGSY सडकों का निर्माण, सिंचाई , बाढ़ रोकथाम, नदियों और नालों की ओढाई के काम को बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जाये
  • मनरेगा के सभी रिक्त पदों को भरा जाए
  • मनरेगा के पारदर्शिता के नियमों का पालन किया जाये. सामाजिक अंकेक्षण धरातल पर उतारो.

Contact No. : 9973363664

जन जागरण शक्ति संगठन (JJSS), जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM), सहज, मनरेगा वाच मुजफ्फरपुर, मुसहर विकास मंच, महिला विकास मंच और लोक परिषद.

* “Rozgar Guarantee? Evaluating India’s Biggest Anti-poverty Programme in India’s Poorest State” World Bank (2012)

Note: For data related to corruption and poor implementation in PDS and ICDS please see Handout 5.